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गर्भावस्था संशोधन विधेयक क्या है और किसे लाभ होगा


लोकसभा में पारित होने के लगभग 1 वर्ष बाद मंगलवार को राज्यसभा में गर्भावस्था संशोधन विधेयक 2010 भी पारित कर दिया गया। 17 मार्च 2020 को Term मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी अमेंडमेंट बिल 2020 ’लोकसभा में पारित किया गया। इस विधेयक में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 में संशोधन का प्रावधान है।
सामान्य शब्दों में, यह बिल गर्भावस्था के मामले में गर्भपात से संबंधित है। इस बिल में मानक समय के प्रावधान किए गए हैं कि कब तक महिलाओं को गर्भपात हो सकता है। सरकार ने इस विधेयक को महिलाओं के बारे में गरिमा, स्वायत्तता और गोपनीयता प्रदान करने के रूप में वर्णित किया है और कहा है कि यह महिलाओं के हित में एक बड़ा कदम है।

गर्भावस्था संशोधन विधेयक की चिकित्सा समाप्ति क्या है?
प्रेग्नेंसी बिल -2020 का मेडिकल टर्मिनेशन गर्भपात यानी गर्भावस्था के दौरान विशेष परिस्थितियों में गर्भपात से संबंधित है। पिछले साल निचले सदन में इस बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि गर्भपात केवल असाधारण परिस्थितियों के लिए स्वीकृत है और इसके लिए इस बिल में पूरी सावधानी बरती गई है।

मेडिकल बिल ऑफ प्रेग्नेंसी बिल में गर्भपात की सीमा 24 सप्ताह तक बढ़ाने का प्रावधान है। इससे पहले, महिलाओं को गर्भाधान के बाद 20 सप्ताह तक की समय सीमा के भीतर गर्भपात हो सकता है। सरकार के अनुसार, इसमें ऐसा प्रावधान किया गया है कि प्रस्तावित कानून का दुरुपयोग न हो।

इस विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के अनुसार, यह बिल महिलाओं के सुरक्षित गर्भपात के लिए समय की जरूरत है। 20 सप्ताह में गर्भपात कराना सुरक्षित नहीं था। इस दौरान कई महिलाएं भी मारी गईं। 24 सप्ताह में गर्भपात कराना अपेक्षाकृत सुरक्षित होगा। इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, गर्भपात के दौरान मरने वालों की संख्या कम हो जाएगी।

इस विधेयक के उद्देश्य क्या हैं?
महिलाओं का सुरक्षित गर्भपात इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य गर्भपात सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना, असुरक्षित गर्भपात के कारण मातृ मृत्यु दर को कम करना और गर्भपात की जटिलताओं को कम करना है।

इस विधेयक से किसे मिलेगी राहत?
विधेयक में विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए गर्भपात की सीमा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार, इस बिल के तहत गर्भपात की सीमा को 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह करना एक बड़ी राहत होगी, खासकर बलात्कार पीड़ितों और विकलांग महिलाओं के लिए।

इस विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के अनुसार, यह बिल महिलाओं के सुरक्षित गर्भपात के लिए समय की जरूरत है। 20 सप्ताह में गर्भपात कराना सुरक्षित नहीं था। इस दौरान कई महिलाएं भी मारी गईं। 24 सप्ताह में गर्भपात कराना अपेक्षाकृत सुरक्षित होगा। इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, गर्भपात के दौरान मरने वालों की संख्या कम हो जाएगी।

इस विधेयक के उद्देश्य क्या हैं?
महिलाओं का सुरक्षित गर्भपात इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य गर्भपात सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना, असुरक्षित गर्भपात के कारण मातृ मृत्यु दर को कम करना और गर्भपात की जटिलताओं को कम करना है।

इस विधेयक से किसे मिलेगी राहत?
विधेयक में विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए गर्भपात की सीमा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार, इस बिल के तहत गर्भपात की सीमा को 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह करना एक बड़ी राहत होगी, खासकर बलात्कार पीड़ितों और विकलांग महिलाओं के लिए।